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क्या आप जानते है भारत में मोबाइल की पहेली घंटी कब बजी थी और किन दोनों के बीच बाते हुई थी ?

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आज के ज़माने में आप मोबाइल फ़ोन के बिना रहना सोच नहीं सकते क्युकी मोबाइल फ़ोन हमारे जिंदगी का एक अंग बन चूका है और हम सारा वक्त मोबाइल फ़ोन लेके घूमते है और इसके सहारे दूर बैठे हमारे दोस्तों या फॅमिली मेंबर के साथ बाते करते है। मोबाइल से अपने जरूरी सामान की खरीददारी, किसी भी चीज की बुकिंग, रास्‍ते का ज्ञान, पढ़ाई वगैरह सब कुछ किया जा रहा है।

भारत में मोबाइल क्रान्ति की शुरुआत की नींव पड़ी थी आज से 25 साल पहले 31 जुलाई, 1995 में, भारत में मोबाइल सेवा को ज्यादा लोगों तक पहुंचने में समय लगा और इसकी वजह थी महंगे कॉल टैरिफ। भारत में तेजी से मोबाइल फोन यूजर्स की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। 1995 से लेकर आज की बात करें तो भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टेलिकॉम मार्केट बन चुका है। सोलह साल बाद 2012 में कोलकाता में 4 जी सेवाएं शुरू की गईं।

Mobile History

मोबाइल सेवा के तौर पर इसकी पहली घंटी और पहली बातचीत तत्‍कालीन दूरसंचार मंत्री सुखराम और पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री ज्‍योति बसु के बीच हुई थी। ज्योति बसु ने यह कॉल कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग से नई दिल्ली स्थित संचार भवन में की थी।

भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर विदेश संचार निगम लिमिटेड ने भारतीयों को इंटरनेट कनेक्टिविटी का तोहफा दिया था। और कंपनी ने गेटवे इंटरनेट ऐक्सिस सर्विस के लॉन्च की थी। शुरुआत में यह सेवा चारों मेट्रो शहरों में ही दी गई थी। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन्स आई-नेट के जरिए लीज्ड लाइन्स या डायल-अप फैसिलिटीज़ के साथ लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते थे। उस वक्त 250 घंटों के लिए 5,000 रुपये देने होते थे जबकि कॉरपोरेट्स के लिए यह फीस 15,000 रुपये थी।

तत्‍कालीन दूरसंचार मंत्री सुखराम और पश्चिम बंगाल के मुख्‍यमंत्री ज्‍योति बसु

मोदी टेल्स्ट्रा नाम के कंपनी भारत की पहली मोबाइल ऑपरेटर कंपनी थी और इसकी सर्विस को मोबाइल नेट (mobile net) के नाम से जाना जाता था। पहली मोबाइल कॉल इसी नेटवर्क पर की गई थी।

भारत में मोबाइल सेवा शुरूआत करने वाली पहली कंपनी का नाम मोदी टेल्स्ट्रा था। भारत के मोदी ग्रुप और ऑस्ट्रेलिया की टेलिकॉम कंपनी टेल्स्ट्रा का जॉइंट वेंचर था मोदी टेल्स्ट्रा। भारत में मोबाइल सर्विस शुरू करने के लिए सरकार ने कुल 8 कंपनियों को लाइसेंस दिए थे। मोदी टेल्स्ट्रा कंपनी उन 8 कंपनियों में से एक थी जिसे देश में सेल्युलर सर्विस प्रोवाइड करने के लिए लाइसेंस मिला था। इस सर्विस को लोगों तक पहुंचाने के लिए कंपनी ने नोकिया के मोबाइल सेट की मदद ली थी। बाद में इस कंपनी ने स्पाइस टेलीकॉम के नाम से सेवाएं दी थीं।

Modi Telstra

आपको बता दें कि सुरुवाती दिनों में एक आउटगोइंग कॉल के लिए 16 रुपये प्रति मिनट तक शुल्क लगता था। मोबाइल नेटवर्क की शुरुआत के समय आउटगोइंग कॉल्स के अलावा, इनकमिंग कॉल्स के पैसे भी देने होते थे। इसी कारन मोबाइल सेवा शुरू होने के 5 साल बाद तक मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या 50 लाख पहुंची। लेकिन इसके बाद यह संख्या कई गुना तेजी से बढ़ी। अगले 10 साल में मोबाइल सब्सक्राइबर्स बेस बढ़कर 687.71 मिलियन हो गया।

लेकिन जैसे-जैसे इस क्षेत्र में नई-नई कंपनियां आईं वैसे-वैसे प्रतिस्‍पर्धा में कॉल की दरों में भी गिरावट आई। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को हुआ और मोबाइल यूजर्स की संख्‍या लगातार बढ़ती चली गई। वर्तमान में लगभग हर जेब में मोबाइल और इंटरनेट उपलब्‍ध है।

मोबाइल संचार क्रांति का फायदा आज हर घर में पहुंच गया है। बर्तमान में कोविड-19 महामारी के चलते भारत में स्‍कूल कॉलेज बंद होने के कारन ऑनलाइन क्‍लासेज चल रही हैं। देश के करोड़ों लोग इसी मोबाइल के माध्‍यम से ऑनलाइन क्‍लासेज ले पा रहे हैं। इसके अलाबा बहुत सारे ऑफिशल्स काम भी क्या जा रहा है।

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